गीता के 5 अनमोल श्लोक | हर भक्त को जीवन में जरूर जानने चाहिए

प्रस्तावना

सनातन संस्कृति का आधार वेद, उपनिषद और पुराण हैं, लेकिन जब भी हम जीवन के सार की बात करते हैं, तो सबसे पहले भगवद गीता का नाम आता है। यह केवल एक धार्मिक ग्रंथ नहीं है, बल्कि ऐसा मार्गदर्शक ग्रंथ है जो जीवन की हर परिस्थिति में हमें सही दिशा दिखाता है।भगवान श्रीकृष्ण ने महाभारत के युद्धभूमि में अर्जुन को जो उपदेश दिए, वही गीता कहलाती है। युद्ध का समय, जब अर्जुन मोह और शंका में डूब गए थे, तब भगवान ने उन्हें न केवल योद्धा का कर्तव्य समझाया, बल्कि जीवन और आत्मा के रहस्यों का उद्घाटन भी किया।

क्यों हर भक्त को गीता जाननी चाहिए?

• गीता शांति और शक्ति देती है।

• यह मोह, दुख और भ्रम को दूर करती है।

• गीता के श्लोक जीवन की कठिनाइयों का समाधान बताते हैं।

• भक्ति के मार्ग पर गीता एक दिव्य प्रकाश है।इस ब्लॉग में हम जानेंगे गीता के 5 ऐसे अनमोल श्लोक जिन्हें हर भक्त को अपने जीवन में अपनाना चाहिए।

1. कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन

श्लोक

कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन।मा कर्मफलहेतुर्भूर्मा ते संगोऽस्त्वकर्मणि॥(अध्याय 2, श्लोक 47)

अर्थ

हे अर्जुन! तेरा अधिकार केवल कर्म करने में है, फल में कभी नहीं। इसलिए तू कर्मफल का कारण मत बन और न ही कर्म न करने में आसक्त हो।

कथा

एक बार एक किसान ने भगवान से प्रार्थना की –“प्रभु! मैं सालभर खेत में मेहनत करता हूँ, लेकिन कभी सूखा, कभी बाढ़ और कभी कीट आ जाते हैं। मेहनत का फल मुझे क्यों नहीं मिलता?”भगवान मुस्कुराए और बोले –“तुम्हारा कर्तव्य है खेत में मेहनत करना। वर्षा, जल और परिणाम मेरे हाथ में हैं। यदि तुम केवल अपने कर्म पर ध्यान दो और बाकी मुझ पर छोड़ दो, तो तुम्हें शांति और संतोष मिलेगा।”

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